कहेंगे माफ़ किया, दोस्त हो तुम हमारे
----प्रेणता : राहुल कौशल
लेखन तिथि दिनांक 11/10/2020
तुम्हारी आखों का यूं झुक कर मुड़ जाना
तुम्हारे छिपे हुए इरादों का भान कराता है
तुम पीठ में हमारी घोप दोगे खंजर
यह रवैया तुम्हारा आभास करता है
मंशा समझ जाता हूँ, चाल ढाल देखकर तेरी
जनता हूँ तू कत्ल की तैयारी में है मेरी !
लेकिन मेरे दोस्त तुम जिन्दा हो अभी तक
सोचो चुप हूँ मैं क्या है मेरी लाचारी
मुझे रोक लेती है कच्ची डोर रिश्तों की
षड्यंत्रों को अनदेखा कर देता हूं तुम्हारे
एक मैं हूँ भूलकर सब गले लगाता हूँ तुम्हें,
और तुम खुश हो रिश्तों कत्ल करके हमारे
कभी बिना शर्तो के यूँही मिलकर तो देखों
फाड़कर छाती से दिल सजाकर तुम्हें देंगे
भले ही लोथड़ा समझ तुम फेंक देना उसे
फिर भी निकलेगी एक आवाज और
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कहेंगे माफ़ किया, दोस्त हो तुम हमारे
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