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कहेंगे माफ़ किया, दोस्त हो तुम हमारे

----प्रेणता : राहुल कौशल लेखन तिथि दिनांक 11/10/2020 तुम्हारी आखों का यूं झुक कर मुड़ जाना तुम्हारे छिपे हुए इरादों का भान कराता है तुम पीठ में हमारी घोप दोगे खंजर यह रवैया तुम्हारा आभास करता है मंशा समझ जाता हूँ, चाल ढाल देखकर तेरी जनता हूँ तू कत्ल की तैयारी में है मेरी ! लेकिन मेरे दोस्त तुम जिन्दा हो अभी तक  सोचो चुप हूँ मैं क्या है मेरी लाचारी मुझे रोक लेती है कच्ची डोर रिश्तों की  षड्यंत्रों को अनदेखा कर देता हूं तुम्हारे एक मैं हूँ भूलकर सब गले लगाता हूँ तुम्हें, और तुम खुश हो रिश्तों कत्ल करके हमारे कभी बिना शर्तो के यूँही मिलकर तो देखों फाड़कर छाती से दिल सजाकर तुम्हें देंगे भले ही लोथड़ा समझ तुम फेंक देना उसे फिर भी निकलेगी एक आवाज और ...... ...... ...... कहेंगे माफ़ किया, दोस्त हो तुम हमारे

क्योकि मां कुछ नही जानती, सब कुछ जानती है...

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प्रणेता : राहुल कौशल प्रा इवेट कंपनी में जॉब करते हुए छुट्टी मिलना, ऐसे है जैसे मरते हुए को प्राणवायु मिलना। कोई भी पर्व हो, निजी संस्थानों में आने वाले मीडिया घरानों में अवकाश नही मिलता। हाँ प्रबन्ध समिति के लंगूरों को यहां छूट होती है। दीपावली पर अवकाश नही मिला क्योकि चैनल तो ऑफलाइन होगा नही, खैर कोई बात नही नौकरी तो करनी है। बाद में घर चले जायेंगे, और हां बलिदान करने के बदले शायद इंसेंटिव मिल जाय ! वैसे इंसेंटिव के बदले अवकाश का प्रावधान होता है, इंसेंटिव के बदले दो दिन मिले तो हम अपने घर जायेंगे। आप घर आते है क्योंकि बेटा हो या बेटी घर पर आने पर स्नेह, दुलार, प्यार जैसी पवार डोज और मिलती है क्या ? घर आया माता जी के गले लगा, माता जी एक साल से कैंसर से पीड़ित है। हमें यह गलतफहमी है कि मां कुछ जानती नही, जबकि वो ही है जो सब जानती है। मुझे देखकर उनमें ना जाने कहा से ताकत आ गयी, बिस्तर छोड़कर घर के बाहर थोड़ा सा घूमी, बहुत बातें की (बातों के बतौले करने में हम मां बेटे को महारत हासिल है)। एक मां कितना प्रेम करती है इस बात से जानिए की शौच के लिए जाने के बारे में अपने शरीर को ऐसे तैयार करती थ...